Political Facts
Wednesday, April 4, 2012
Sadvi Pragya: The torture of innocent.
||बहन प्रज्ञा की मार्मिक दशा : एक साध्वी को हिन्दू होने की सजा और कितनी देर तक|| बहन प्रज्ञा की सचाई अवश्य पढ़े | मैं साध्वी प्रज्ञा चंद्रपाल सिंह ठाकुर, उम्र-38 साल, पेशा-कुछ नहीं, 7 गंगा सागर ...अपार्टमेन्ट, कटोदरा, सूरत,गुजरात राज्य की निवासी हूं जबकि मैं मूलतः मध्य प्रदेश की निवासिनी हूं. कुछ साल पहले हमारे अभिभा...वक सूरत आकर बस गये. पिछले कुछ सालों से मैं अनुभव कर रही हूं कि भौतिक जगत से मेरा कटाव होता जा रहा है. आध्यात्मिक जगत लगातार मुझे अपनी ओर आकर्षित कर रहा था. इसके कारण मैंने भौतिक जगत को अलविदा करने का निश्चय कर लिया और 30-01-2007 को संन्यासिन हो गयी. जब से सन्यासिन हुई हूं मैं अपने जबलपुर वाले आश्रम से निवास कर रही हूं. आश्रम में मेरा अधिकांश समय ध्यान-साधना, योग, प्राणायम और आध्यात्मिक अध्ययन में ही बीतता था. आश्रम में टीवी इत्यादि देखने की मेरी कोई आदत नहीं है, यहां तक कि आश्रम में अखबार की कोई समुचित व्यवस्था भी नहीं है. आश्रम में रहने के दिनों को छोड़ दें तो बाकी समय मैं उत्तर भारत के ज्यादातर हिस्सों में धार्मिक प्रवचन और अन्य धार्मिक कार्यों को संपन्न कराने के लिए उत्तर भारत में यात्राएं करती हूं. 23-9-2008 से 4-10-2008 के दौरान मैं इंदौर में थी और यहां मैं अपने एक शिष्य अण्णाजी के घर रूकी थी. 4 अक्टूबर की शाम को मैं अपने आश्रम जबलपुर वापस आ गयी. 7-10-2008 को जब मैं अपने जबलपुर के आश्रम में थी तो शाम को महाराष्ट्र से एटीएस के एक पुलिस अधिकारी का फोन मेरे पास आया जिन्होंने अपना नाम सावंत बताया. वे मेरी एलएमएल फ्रीडम बाईक के बारे में जानना चाहते थे. मैंने उनसे कहा कि वह बाईक तो मैंने बहुत पहले बेच दी है. अब मेरा उस बाईक से कोई नाता नहीं है. फिर भी उन्होंने मुझे कहा कि अगर मैं सूरत आ जाऊं तो वे मुझसे कुछ पूछताछ करना चाहते हैं. मेरे लिए तुरंत आश्रम छोड़कर सूरत जाना संभव नहीं था इसलिए मैंने उन्हें कहा कि हो सके तो आप ही जबलपुर आश्रम आ जाईये, आपको जो कुछ पूछताछ करनी है कर लीजिए. लेकिन उन्होंने जबलपुर आने से मना कर दिया और कहा कि जितनी जल्दी हो आप सूरत आ जाईये. फिर मैंने ही सूरत जाने का निश्चय किया और ट्रेन से उज्जैन के रास्ते 10-10-2008 को सुबह सूरत पहुंच गयी. रेलवे स्टेशन पर भीमाभाई पसरीचा मुझे लेने आये थे. उनके साथ मैं उनके निवासस्थान एटाप नगर चली गयी. यहीं पर सुबह के कोई 10 बजे मेरी सावंत से मुलाकात हुई जो एलएमएल बाईक की खोज करते हुए पहले से ही सूरत में थे. सावंत से मैंने पूछा कि मेरी बाईक के साथ क्या हुआ और उस बाईक के बारे में आप पडताल क्यों कर रहे हैं? श्रीमान सावंत ने मुझे बताया कि पिछले सप्ताह सितंबर में मालेगांव में जो विस्फोट हुआ है उसमें वही बाईक इस्तेमाल की गयी है. यह मेरे लिए भी बिल्कुल नयी जानकारी थी कि मेरी बाईक का इस्तेमाल मालेगांव धमाकों में किया गया है. यह सुनकर मैं सन्न रह गयी. मैंने सावंत को कहा कि आप जिस एलएमएल फ्रीडम बाईक की बात कर रहे हैं उसका रंग और नंबर वही है जिसे मैंने कुछ साल पहले बेच दिया था. सूरत में सावंत से बातचीत में ही मैंने उन्हें बता दिया था कि वह एलएमएल फ्रीडम बाईक मैंने अक्टूबर 2004 में ही मध्यप्रदेश के श्रीमान जोशी को 24 हजार में बेच दी थी. उसी महीने में मैंने आरटीओ के तहत जरूरी कागजात (टीटी फार्म) पर हस्ताक्षर करके बाईक की लेन-देन पूरी कर दी थी. मैंने साफ तौर पर सावंत को कह दिया था कि अक्टूबर 2004 के बाद से मेरा उस बाईक पर कोई अधिकार नहीं रह गया था. उसका कौन इस्तेमाल कर रहा है इससे भी मेरा कोई मतलब नहीं था. लेकिन सावंत ने कहा कि वे मेरी बात पर विश्वास नहीं कर सकते. इसलिए मुझे उनके साथ मुंबई जाना पड़ेगा ताकि वे और एटीएस के उनके अन्य साथी इस बारे में और पूछताछ कर सकें. पूछताछ के बाद मैं आश्रम आने के लिए आजाद हूं. यहां यह ध्यान देने की बात है कि सीधे तौर पर मुझे 10-10-2008 को गिरफ्तार नहीं किया गया. मुंबई में पूछताछ के लिए ले जाने की बाबत मुझे कोई सम्मन भी नहीं दिया गया. जबकि मैं चाहती तो मैं सावंत को अपने आश्रम ही आकर पूछताछ करने के लिए मजबूर कर सकती थी क्योंकि एक नागरिक के नाते यह मेरा अधिकार है. लेकिन मैंने सावंत पर विश्वास किया और उनके साथ बातचीत के दौरान मैंने कुछ नहीं छिपाया. मैं सावंत के साथ मुंबई जाने के लिए तैयार हो गयी. सावंत ने कहा कि मैं अपने पिता से भी कहूं कि वे मेरे साथ मुंबई चलें. मैंने सावंत से कहा कि उनकी बढ़ती उम्र को देखते हुए उनको साथ लेकर चलना ठीक नहीं होगा. इसकी बजाय मैंने भीमाभाई को साथ लेकर चलने के लिए कहा जिनके घर में एटीएस मुझसे पूछताछ कर रही थी. शाम को 5.15 मिनट पर मैं, सावंत और भीमाभाई सूरत से मुंबई के लिए चल पड़े. 10 अक्टूबर को ही देर रात हम लोग मुंबई पहुंच गये. मुझे सीधे कालाचौकी स्थित एटीएस के आफिस ले जाया गया था. इसके बाद अगले दो दिनों तक एटीएस की टीम मुझसे पूछताछ करती रही. उनके सारे सवाल 29-9-2008 को मालेगांव में हुए विस्फोट के इर्द-गिर्द ही घूम रहे थे. मैं उनके हर सवाल का सही और सीधा जवाब दे रही थी. अक्टूबर को एटीएस ने अपनी पूछताछ का रास्ता बदल दिया. अब उसने उग्र होकर पूछताछ करना शुरू किया. पहले उन्होंने मेरे शिष्य भीमाभाई पसरीचा (जिन्हें मैं सूरत से अपने साथ लाई थी) से कहा कि वह मुझे बेल्ट और डंडे से मेरी हथेलियों, माथे और तलुओं पर प्रहार करे. जब पसरीचा ने ऐसा करने से मना किया तो एटीएस ने पहले उसको मारा-पीटा. आखिरकार वह एटीएस के कहने पर मेरे ऊपर प्रहार करने लगा. कुछ भी हो, वह मेरा शिष्य है और कोई शिष्य अपने गुरू को चोट नहीं पहुंचा सकता. इसलिए प्रहार करते वक्त भी वह इस बात का ध्यान रख रहा था कि मुझे कोई चोट न लग जाए. इसके बाद खानविलकर ने उसको किनारे धकेल दिया और बेल्ट से खुद मेरे हाथों, हथेलियों, पैरों, तलुओं पर प्रहार करने लगा. मेरे शरीर के हिस्सों में अभी भी सूजन मौजूद है. 13 तारीख तक मेरे साथ सुबह, दोपहर और रात में भी मारपीट की गयी. दो बार ऐसा हुआ कि भोर में चार बजे मुझे जगाकर मालेगांव विस्फोट के बारे में मुझसे पूछताछ की गयी. भोर में पूछताछ के दौरान एक मूछवाले आदमी ने मेरे साथ मारपीट की जिसे मैं अभी भी पहचान सकती हूं. इस दौरान एटीएस के लोगों ने मेरे साथ बातचीत में बहुत भद्दी भाषा का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया. मेरे गुरू का अपमान किया गया और मेरी पवित्रता पर सवाल किये गये. मुझे इतना परेशान किया गया कि मुझे लगा कि मेरे सामने आत्महत्या करने के अलावा अब कोई रास्ता नहीं बचा है. 14 अक्टूबर को सुबह मुझे कुछ जांच के लिए एटीएस कार्यालय से काफी दूर ले जाया गया जहां से दोपहर में मेरी वापसी हुई. उस दिन मेरी पसरीचा से कोई मुलाकात नहीं हुई. मुझे यह भी पता नहीं था कि वे (पसरीचा) कहां है. 15 अक्टूबर को दोपहर बाद मुझे और पसरीचा को एटीएस के वाहनों में नागपाड़ा स्थित राजदूत होटल ले जाया गया जहां कमरा नंबर 315 और 314 में हमे क्रमशः बंद कर दिया गया. यहां होटल में हमने कोई पैसा जमा नहीं कराया और न ही यहां ठहरने के लिए कोई खानापूर्ति की. सारा काम एटीएस के लोगों ने ही किया. मुझे होटल में रखने के बाद एटीएस के लोगों ने मुझे एक मोबाईल फोन दिया. एटीएस ने मुझे इसी फोन से अपने कुछ रिश्तेदारों और शिष्यों (जिसमें मेरी एक महिला शिष्य भी शामिल थी) को फोन करने के लिए कहा और कहा कि मैं फोन करके लोगों को बताऊं कि मैं एक होटल में रूकी हूं और सकुशल हूं. मैंने उनसे पहली बार यह पूछा कि आप मुझसे यह सब क्यों कहलाना चाह रहे हैं. समय आनेपर मैं उस महिला शिष्य का नाम भी सार्वजनिक कर दूंगी. एटीएस की इस प्रताड़ना के बाद मेरे पेट और किडनी में दर्द शुरू हो गया. मुझे भूख लगनी बंद हो गयी. मेरी हालत बिगड़ रही थी. होटल राजदूत में लाने के कुछ ही घण्टे बाद मुझे एक अस्पताल में भर्ती करा दिया गया जिसका नाम सुश्रुसा हास्पिटल था. मुझे आईसीयू में रखा गया. इसके आधे घण्टे के अंदर ही भीमाभाई पसरीचा भी अस्पताल में लाये गये और मेरे लिए जो कुछ जरूरी कागजी कार्यवाही थी वह एटीएस ने भीमाभाई से पूरी करवाई. जैसा कि भीमाभाई ने मुझे बताया कि श्रीमान खानविलकर ने हास्पिटल में पैसे जमा करवाये. इसके बाद पसरीचा को एटीएस वहां से लेकर चली गयी जिसके बाद से मेरा उनसे किसी प्रकार का कोई संपर्क नहीं हो पाया है. इस अस्पताल में कोई 3-4 दिन मेरा इलाज किया गया. यहां मेरी स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा था तो मुझे यहां से एक अन्य अस्पताल में ले जाया गया जिसका नाम मुझे याद नहीं है. यह एक ऊंची ईमारत वाला अस्पताल था जहां दो-तीन दिन मेरा ईलाज किया गया. इस दौरान मेरे साथ कोई महिला पुलिसकर्मी नहीं रखी गयी. न ही होटल राजदूत में और न ही इन दोनो अस्पतालों में. होटल राजदूत और दोनों अस्पताल में मुझे स्ट्रेचर पर लाया गया, इस दौरान मेरे चेहरे को एक काले कपड़े से ढंककर रखा गया. दूसरे अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद मुझे फिर एटीएस के आफिस कालाचौकी लाया गया. इसके बाद 23-10-2008 को मुझे गिरफ्तार किया गया. गिरफ्तारी के अगले दिन 24-10-2008 को मुझे मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, नासिक की कोर्ट में प्रस्तुत किया गया जहां मुझे 3-11-2008 तक पुलिस कस्टडी में रखने का आदेश हुआ. 24 तारीख तक मुझे वकील तो छोड़िये अपने परिवारवालों से भी मिलने की इजाजत नहीं दी गयी. मुझे बिना कानूनी रूप से गिरफ्तार किये ही 23-10-2008 के पहले ही पालीग्रैफिक टेस्ट किया गया. इसके बाद 1-11-2008 को दूसरा पालिग्राफिक टेस्ट किया गया. इसी के साथ मेरा नार्को टेस्ट भी किया गया. मैं कहना चाहती हूं कि मेरा लाई डिटेक्टर टेस्ट और नार्को एनेल्सिस टेस्ट बिना मेरी अनुमति के किये गये. सभी परीक्षणों के बाद भी मालेगांव विस्फोट में मेरे शामिल होने का कोई सबूत नहीं मिल रहा था. आखिरकार 2 नवंबर को मुझे मेरी बहन प्रतिभा भगवान झा से मिलने की इजाजत दी गयी. मेरी बहन अपने साथ वकालतनामा लेकर आयी थी जो उसने और उसके पति ने वकील गणेश सोवानी से तैयार करवाया था. हम लोग कोई निजी बातचीत नहीं कर पाये क्योंकि एटीएस को लोग मेरी बातचीत सुन रहे थे. आखिरकार 3 नवंबर को ही सम्माननीय अदालत के कोर्ट रूम में मैं चार-पांच मिनट के लिए अपने वकील गणेश सोवानी से मिल पायी. 10 अक्टूबर के बाद से लगातार मेरे साथ जो कुछ किया गया उसे अपने वकील को मैं चार-पांच मिनट में ही कैसे बता पाती? इसलिए हाथ से लिखकर माननीय अदालत को मेरा जो बयान दिया था उसमें विस्तार से पूरी बात नहीं आ सकी. इसके बाद 11 नवंबर को भायखला जेल में एक महिला कांस्टेबल की मौजूदगी में मुझे अपने वकील गणेश सोवानी से एक बार फिर 4-5 मिनट के लिए मिलने का मौका दिया गया. इसके अगले दिन 13 नवंबर को मुझे फिर से 8-10 मिनट के लिए वकील से मिलने की इजाजत दी गयी. इसके बाद शुक्रवार 14 नवंबर को शाम 4.30 मिनट पर मुझे मेरे वकील से बात करने के लिए 20 मिनट का वक्त दिया गया जिसमें मैंने अपने साथ हुई सारी घटनाएं सिलसिलेवार उन्हें बताई, जिसे यहां प्रस्तुत किया गया है. (मालेगांव बमकांड के संदेह में गिरफ्तार साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर द्वारा नासिक कोर्ट में दिये गये शपथपत्र पर आधारित.
Thursday, March 29, 2012
Reality of Sonia Gandhi by Swami Ji.
http://www.facebook.com/photo.php?fbid=345659578818760&set=a.108381389213248.14263.100001241612742&type=1&comment_id=874176#!/photo.php?fbid=205613246156728&set=a.108381389213248.14263.100001241612742&type=1&permPage=1
Indian temple sculpture of gods and goddesses, antiques, pichwai paintings, shatoosh shawls, coins, and you name it, were transported to Italy to be first displayed in two shops [see Annexure-16] owned by her sister, Anuskha alias Alessandra Maino Vinci. These shops located in blue-collar areas of Rivolta[shop name: Etnica] and Orbassano [shop name: Ganpati] did little business because which blue collar Italian wants to buy Indian antiques ? The shops were there to make false bills, and thereafter these treasures were taken to London for auction by Sotheby’s and Christies.
Some of this ill-gotten money from auction went into the bank accounts of Rahul Gandhi in the National Westminister Bank and Hongkong & Shanghai Bank, London branches, but most of it found it’s way into the Gandhi family account in the Bank of America in Cayman Islands. Rahul’s expenses and tuition fees for the one year he was at Harvard, was paid from that Cayman Island account [see Annexures-17].
What kind of people are these Gandhi-Mainos that bite the very hand of Bharat Mata that fed them and gave them a good life? How can the nation trust or tolerate such greedy thieves of national treasures?
Since I failed to persuade the Vajpayee government to defend India’s treasures from plunder by the Mainos, I approached the Delhi High Court in a PIL. The first Bench of the court issued notice to the Government, but since the Indian government dragged it’s feet, the Court directed the CBI to seek Interpol’s and Italian government’s help. The Italian government justifiably asked for a Letter Rogatory for which a FIR is a pre-requisite. But the Interpol did oblige and submitted two voluminous reports on the shops which the Court directed the CBI to hand over to me. But CBI has so far refused, and has claimed privilege!
This question will be argued out at the next hearing of my PIL.
The CBI has also been caught lying in court by telling the judges that Alessandra Maino is a name of a man, and Via Bellini 14, Orbassano is a name of a village[not the street address of the Maino’s residence]. Although the CBI counsel had to apologise later to the court stating he had made a mistake, he has been promoted to Additional Solicitor General by the new government! Why was he appointed as the CBI’s counsel by the Vajpayee government in the first place? The Vajpayee-Sonia mutual assistance pact is thus in full view in this episode.
But the most sinister aspect of Sonia Gandhi’s links is her connection with terrorists. I am still working on it, but she has had long connection with the Habash group of Palestinians [PFLP], and has funded Palestinian families that lost their kith and kin in a suicide bombing or hijacking episode. This fact, Rajiv Gandhi himself told me and was confirmed to me [the funding aspect] by Yassir Arafat when I met him in Tunis on October 17, 1990 at the request of Rajiv Gandhi. Rajiv and I were good friends from 1978, but became very close friends after V.P. Singh had betrayed him in 1987. We met practically every day, mostly in the early hours from 1AM to 4AM, discussed, chatted and gossiped on every topic. It was at my suggestion that Rajiv made Chandrashekhar the PM. And contrary to public impression, he was not mainly responsible for fall of Chandrashekar government[of which I was a Minister].
Dr.Subrahamaniyam Swamy
Indian temple sculpture of gods and goddesses, antiques, pichwai paintings, shatoosh shawls, coins, and you name it, were transported to Italy to be first displayed in two shops [see Annexure-16] owned by her sister, Anuskha alias Alessandra Maino Vinci. These shops located in blue-collar areas of Rivolta[shop name: Etnica] and Orbassano [shop name: Ganpati] did little business because which blue collar Italian wants to buy Indian antiques ? The shops were there to make false bills, and thereafter these treasures were taken to London for auction by Sotheby’s and Christies.
Some of this ill-gotten money from auction went into the bank accounts of Rahul Gandhi in the National Westminister Bank and Hongkong & Shanghai Bank, London branches, but most of it found it’s way into the Gandhi family account in the Bank of America in Cayman Islands. Rahul’s expenses and tuition fees for the one year he was at Harvard, was paid from that Cayman Island account [see Annexures-17].
What kind of people are these Gandhi-Mainos that bite the very hand of Bharat Mata that fed them and gave them a good life? How can the nation trust or tolerate such greedy thieves of national treasures?
Since I failed to persuade the Vajpayee government to defend India’s treasures from plunder by the Mainos, I approached the Delhi High Court in a PIL. The first Bench of the court issued notice to the Government, but since the Indian government dragged it’s feet, the Court directed the CBI to seek Interpol’s and Italian government’s help. The Italian government justifiably asked for a Letter Rogatory for which a FIR is a pre-requisite. But the Interpol did oblige and submitted two voluminous reports on the shops which the Court directed the CBI to hand over to me. But CBI has so far refused, and has claimed privilege!
This question will be argued out at the next hearing of my PIL.
The CBI has also been caught lying in court by telling the judges that Alessandra Maino is a name of a man, and Via Bellini 14, Orbassano is a name of a village[not the street address of the Maino’s residence]. Although the CBI counsel had to apologise later to the court stating he had made a mistake, he has been promoted to Additional Solicitor General by the new government! Why was he appointed as the CBI’s counsel by the Vajpayee government in the first place? The Vajpayee-Sonia mutual assistance pact is thus in full view in this episode.
But the most sinister aspect of Sonia Gandhi’s links is her connection with terrorists. I am still working on it, but she has had long connection with the Habash group of Palestinians [PFLP], and has funded Palestinian families that lost their kith and kin in a suicide bombing or hijacking episode. This fact, Rajiv Gandhi himself told me and was confirmed to me [the funding aspect] by Yassir Arafat when I met him in Tunis on October 17, 1990 at the request of Rajiv Gandhi. Rajiv and I were good friends from 1978, but became very close friends after V.P. Singh had betrayed him in 1987. We met practically every day, mostly in the early hours from 1AM to 4AM, discussed, chatted and gossiped on every topic. It was at my suggestion that Rajiv made Chandrashekhar the PM. And contrary to public impression, he was not mainly responsible for fall of Chandrashekar government[of which I was a Minister].
Dr.Subrahamaniyam Swamy
Thursday, March 22, 2012
Whatz happening in this country?
इस देश में तिंरंगा फहराने पर आपत्ति ।
इस देश में वंदे मातरम गाने पर आपत्ति ।
इस देश में भारत माता की तस्वीर मंच पर लगाने पर आपत्ति ।
इस देश में राम मंदिर की मांग पर आपत्ति ।
इस देश में राम - सेतू तोडने से रोकने पर आपत्ति ।
... ... इस देश में अफजल की फांसी पर आपत्ति ।
इस देश में कसाब की फांसी पर आपत्ति ।
इस देश में अमरनाथ यात्रा पर आपत्ति ।
इस देश में सलमान रुश्दी की यात्रा पर आपत्ति ।
इस देश में सूर्य नमस्कार पर आपत्ति ।
इस देश में गोधरा-कांड की प्रतिक्रिया पर आपत्ति ।
और इस देश में मुस्लिम आरक्षण पर सहमति ।
इस देश में मकबूल फिदा हुसैन द्वारा रचित नग्न हिंदु देवी-देवताओं की तस्वीरों पर सहमति ।
इस देश में हज यात्रा पर सबसीडी पर सहमति ।
इस देश में धर्मों के आधार पर अलग 2 कानून पर सहमति ।
इस देश में गोधरा-कांड पर सहमति ।
इस देश में राष्ट्रवादी संगठनों को आतंकवादी कहने पर सहमति ।
इस देश में साधु-संतो के साथ बदतमीजी को सहमति ।..
इस देश में वंदे मातरम गाने पर आपत्ति ।
इस देश में भारत माता की तस्वीर मंच पर लगाने पर आपत्ति ।
इस देश में राम मंदिर की मांग पर आपत्ति ।
इस देश में राम - सेतू तोडने से रोकने पर आपत्ति ।
... ... इस देश में अफजल की फांसी पर आपत्ति ।
इस देश में कसाब की फांसी पर आपत्ति ।
इस देश में अमरनाथ यात्रा पर आपत्ति ।
इस देश में सलमान रुश्दी की यात्रा पर आपत्ति ।
इस देश में सूर्य नमस्कार पर आपत्ति ।
इस देश में गोधरा-कांड की प्रतिक्रिया पर आपत्ति ।
और इस देश में मुस्लिम आरक्षण पर सहमति ।
इस देश में मकबूल फिदा हुसैन द्वारा रचित नग्न हिंदु देवी-देवताओं की तस्वीरों पर सहमति ।
इस देश में हज यात्रा पर सबसीडी पर सहमति ।
इस देश में धर्मों के आधार पर अलग 2 कानून पर सहमति ।
इस देश में गोधरा-कांड पर सहमति ।
इस देश में राष्ट्रवादी संगठनों को आतंकवादी कहने पर सहमति ।
इस देश में साधु-संतो के साथ बदतमीजी को सहमति ।..
Wednesday, March 21, 2012
कुछ प्रश्न
श्रीराम सेना, आर एस एस - सांप्रदायिक
हूजी, सिमी- ????
टोपी - सेकुलर
तिलक - सांप्रदायिक ?
...
मंदिर : सांप्रदायिक
मस्जिद, चर्च - सेकुलर ?
गोधरा हत्याकांड - एक हादसा
उस पर प्रतिकृया - सांप्रदायिकता ?
बाबर की मस्जिद - सेकुलरता का प्रतीक
राम मंदिर आंदोलन - सांप्रदायिकता ?
राणा प्रताप - पर कोई फिल्म नहीं
अकबर - पर जोधा अकबर महान ?
भगत सिंह, वीर सावरकर- आतंकवादी
गांधी- ????
आसाराम बापू जी - हत्यारा
जॉन दयाल बिशप - महात्मा ?
इमाम : सेकुलर
मोदी : सांप्रदायिक ?
दारा सिंह - हत्यारा, हिन्दू सांप्रदायिक
मिशनरी - लोभ लालच देकर, बलात धर्म परिवर्तन आजादी ?
गुजरात दंगे - हिन्दू आतंकवाद
कश्मीरी हिन्दूओ का नरसंहार - ?
प्रज्ञा सिंह ठाकुर - हिन्दू आतंकवाद
अफजल, कसाब, मदनी - किसी भी धर्म को आतंकवाद से न जोड़े
हूजी, सिमी- ????
टोपी - सेकुलर
तिलक - सांप्रदायिक ?
...
मंदिर : सांप्रदायिक
मस्जिद, चर्च - सेकुलर ?
गोधरा हत्याकांड - एक हादसा
उस पर प्रतिकृया - सांप्रदायिकता ?
बाबर की मस्जिद - सेकुलरता का प्रतीक
राम मंदिर आंदोलन - सांप्रदायिकता ?
राणा प्रताप - पर कोई फिल्म नहीं
अकबर - पर जोधा अकबर महान ?
भगत सिंह, वीर सावरकर- आतंकवादी
गांधी- ????
आसाराम बापू जी - हत्यारा
जॉन दयाल बिशप - महात्मा ?
इमाम : सेकुलर
मोदी : सांप्रदायिक ?
दारा सिंह - हत्यारा, हिन्दू सांप्रदायिक
मिशनरी - लोभ लालच देकर, बलात धर्म परिवर्तन आजादी ?
गुजरात दंगे - हिन्दू आतंकवाद
कश्मीरी हिन्दूओ का नरसंहार - ?
प्रज्ञा सिंह ठाकुर - हिन्दू आतंकवाद
अफजल, कसाब, मदनी - किसी भी धर्म को आतंकवाद से न जोड़े
Thursday, March 15, 2012
Congress Rail Mantralaya ka nikamma pan
१- एक साल पहले संसद मे रेल मंत्री ने सिकंदराबाद और विशाखापट्टनम के बीच हप्ते मे तीन दिन एसी दुरंतो एक्सप्रेस की घोषणा की थी .. रेलमंत्रालय के कागजो मे ये ट्रेन चल रही है .लेकिन असलियत मे नही चल रही है ..
२- तीन साल पहले संसद मे दिल्ली लुधियाना शताब्दी रोज चलाने की घोषणा की थी .जो आजतक सिर्फ हप्ते मे सिर्फ तीन दिन ही चलती है
३- तिरुवनंतपुरम - चेन्नई दुरंतो एक्सप्रेस आज तक नही चली
४- चार साल पहले रेलमंत्री ने रेलबजट मे मनमाड --कुर्ला टर्मिनस के बीच राज्य रानी एक्सप्रेस की घोषणा की थी .जो आजतक नही चल रही है |
५- पिछले साल बजट मे जयपुर -दिल्ली डबल डेकर ट्रेन की घोषणा हुयी थी ..जो आजतक नही चल रही है
६- दो साल पहले जयपुर -आगरा शताब्दी ट्रेन की घोषणा हुयी थी ..जो आजतक नही चल रही है
७- तीन साल पहले अजमेर निजामुद्दीन सुपरफास्ट की घोषणा हुयी थी ..जो आजतक नही चल रही है |
८- पिछले रेल बजट मे ३३ ट्रेनों के रूट बढाने की घोषणा हुयी थी ..लेकिन सिर्फ १३ के रूट लम्बे किये गए |
९- पिछले साल रेलबजट मे २२ ट्रेन की फ्रीक्वेंसी बढाने की घोषणा हुयी थी लेकिन सिर्फ १२ ट्रेनों के ही फ्रिक्वेंसी बढ़ी |
परीयोजनाओ के हाल
~~~~~~~~~~
१- तीन साल पहले आंध्रप्रदेश के काजीपेट मे रेल कोच फ्रेक्ट्री की घोषणा हुयी थी .. लेकिन आज तक एक ईंट तक नही लगा |
२- पांच साल पहले केरल के चेरथला मे रेल कोच फेक्ट्री को घोषणा हुयी थी ..आजतक वहा कुत्ते घूम रहे है ..
३- यूपी मे रायबरेली मे रेल कोच फेक्ट्री का आजतक काम नहीं शुरू हुआ ..
४- पिछले साल ममता बनर्जी ने रेलवे के खुद के पावर प्लांट की घोषणा करके खूब वाहवाही बटोरी थी ..जिसमे बंगाल मे आद्रा , महाराष्ट्र मे थार्कुली , बिहार के नबीनगर मे रेल के थर्मल प्लांट की घोषणा हुयी थी ...लेकिन आजतक कुछ नही हुआ |
५- २००५ के रेल बजट मे बिहार के मधेपुरा मे इलेक्ट्रिक इंजन का कारखाना और मारहोवर मे डीजल इंजन के कारखाना लगाने की घोषणा हुयी थी | लेकिन आज तक कुछ नही हुआ |
६- केरल के पल्लक्क्ड मे रेल कोच फेक्ट्री की घोषणा २००५ के बजट मे हुयी थी लेकिन आज तक कुछ नही हुआ |
७- तीन साल पहले ५८४ रेलवेस्टेशन को "वर्ल्ड क्लास " बनाने की घोषणा हुयी थी .. लेकिन आज भी सभी "थर्ड क्लास " ही है |
८- पिछले साल ममता बनर्जी ने हवाईअड्डे के जैसे बीस रेलवे स्टेशनों पर लगेज ट्रोली रखने की घोषणा की थी ..लेकिन आज तक कुछ नही हुआ |
मित्रों , हमे इस नीच कांग्रेस की हकीकत जानने और लोगो को बनाने की अब सख्त जरूरत है ..क्योकि ये सिर्फ हमे मुर्ख समझते है |
इतना ही नही देश के बीस रेल डिविजन के डीआरएम ने रेल मंत्रालय को पत्र लिखकर कहा है कि अब हमारे पास इससे ज्यादा ट्रेन चलाने की छमता ही नही है ..या तो आप रेल का इन्फ्रास्ट्रक्चर बढाइये या फिर कोई भी नई ट्रेन की घोषणा ही मत करिये |
२- तीन साल पहले संसद मे दिल्ली लुधियाना शताब्दी रोज चलाने की घोषणा की थी .जो आजतक सिर्फ हप्ते मे सिर्फ तीन दिन ही चलती है
३- तिरुवनंतपुरम - चेन्नई दुरंतो एक्सप्रेस आज तक नही चली
४- चार साल पहले रेलमंत्री ने रेलबजट मे मनमाड --कुर्ला टर्मिनस के बीच राज्य रानी एक्सप्रेस की घोषणा की थी .जो आजतक नही चल रही है |
५- पिछले साल बजट मे जयपुर -दिल्ली डबल डेकर ट्रेन की घोषणा हुयी थी ..जो आजतक नही चल रही है
६- दो साल पहले जयपुर -आगरा शताब्दी ट्रेन की घोषणा हुयी थी ..जो आजतक नही चल रही है
७- तीन साल पहले अजमेर निजामुद्दीन सुपरफास्ट की घोषणा हुयी थी ..जो आजतक नही चल रही है |
८- पिछले रेल बजट मे ३३ ट्रेनों के रूट बढाने की घोषणा हुयी थी ..लेकिन सिर्फ १३ के रूट लम्बे किये गए |
९- पिछले साल रेलबजट मे २२ ट्रेन की फ्रीक्वेंसी बढाने की घोषणा हुयी थी लेकिन सिर्फ १२ ट्रेनों के ही फ्रिक्वेंसी बढ़ी |
परीयोजनाओ के हाल
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१- तीन साल पहले आंध्रप्रदेश के काजीपेट मे रेल कोच फ्रेक्ट्री की घोषणा हुयी थी .. लेकिन आज तक एक ईंट तक नही लगा |
२- पांच साल पहले केरल के चेरथला मे रेल कोच फेक्ट्री को घोषणा हुयी थी ..आजतक वहा कुत्ते घूम रहे है ..
३- यूपी मे रायबरेली मे रेल कोच फेक्ट्री का आजतक काम नहीं शुरू हुआ ..
४- पिछले साल ममता बनर्जी ने रेलवे के खुद के पावर प्लांट की घोषणा करके खूब वाहवाही बटोरी थी ..जिसमे बंगाल मे आद्रा , महाराष्ट्र मे थार्कुली , बिहार के नबीनगर मे रेल के थर्मल प्लांट की घोषणा हुयी थी ...लेकिन आजतक कुछ नही हुआ |
५- २००५ के रेल बजट मे बिहार के मधेपुरा मे इलेक्ट्रिक इंजन का कारखाना और मारहोवर मे डीजल इंजन के कारखाना लगाने की घोषणा हुयी थी | लेकिन आज तक कुछ नही हुआ |
६- केरल के पल्लक्क्ड मे रेल कोच फेक्ट्री की घोषणा २००५ के बजट मे हुयी थी लेकिन आज तक कुछ नही हुआ |
७- तीन साल पहले ५८४ रेलवेस्टेशन को "वर्ल्ड क्लास " बनाने की घोषणा हुयी थी .. लेकिन आज भी सभी "थर्ड क्लास " ही है |
८- पिछले साल ममता बनर्जी ने हवाईअड्डे के जैसे बीस रेलवे स्टेशनों पर लगेज ट्रोली रखने की घोषणा की थी ..लेकिन आज तक कुछ नही हुआ |
मित्रों , हमे इस नीच कांग्रेस की हकीकत जानने और लोगो को बनाने की अब सख्त जरूरत है ..क्योकि ये सिर्फ हमे मुर्ख समझते है |
इतना ही नही देश के बीस रेल डिविजन के डीआरएम ने रेल मंत्रालय को पत्र लिखकर कहा है कि अब हमारे पास इससे ज्यादा ट्रेन चलाने की छमता ही नही है ..या तो आप रेल का इन्फ्रास्ट्रक्चर बढाइये या फिर कोई भी नई ट्रेन की घोषणा ही मत करिये |
Wednesday, March 7, 2012
The wrong way of Liberalization
भारत में एक प्रधानमंत्री हुए मोरारजी देसाई उनकी सरकार ने भारत में जितने भी Zero Technology के क्षेत्र में MNC (Multi National Company) काम कर रहे थे उनमे से अधिकांश को भारत से भगाया था | ये Zero Technology वाले उत्पादों की संख्या लगभग 700 थी | और आप ध्यान दीजियेगा कि ये जितने भी MNC आये हैं वो उन्हीं क्षेत्रों में निवेश कर रहे हैं जिस क्षेत्र को मोरारजी देसाई की सरकार ने प्रतिबंधित किया था | मतलब जिन कंपनियों को मोरारजी देसाई की सरकार ने भगाया था सब की सब वापस आ गयी हैं | दूसरी बात, जितने भी MNC हैं वो कभी भी हमारे देश में आ के कोई technology के क्षेत्र में निवेश नहीं करते हैं | क्या कभी किसी कंपनी ने आ के यहाँ satellite बनाया या किसी ने मिसाइल बनाने में मदद की ? Technology इस देश में बाहर से जो भी आती है वो outdated /redundant होती है | 1991 में उदारीकरण (जिसे मैं उधारीकरण कहता हूँ ) के बाद जितने भी MoU (Memorandum of Understanding) sign हुए इस देश में सब के सब zero technology के क्षेत्र में हुए हैं | आप देखिएगा कि ये क्या बनाती हैं और बेचती हैं, ये बनाती है - साबुन,वाशिंग पावडर, आलू का चिप्स, टमाटर की चटनी, आम का आचार, बोतल का पानी, चोकलेट, बिस्कुट, पावरोटी, आदि, आदि | एक भी उदहारण कोई दे दे जब इन विदेशी कंपनियों ने तकनीक के क्षेत्र में निवेश किया हो | भारत ने अपने स्वदेशी तकनीक से सुपर कंप्यूटर बनाया, भारत ने अपने बूते मिसाइल बनाया, भारत ने अपने दम पर क्रायोजनिक इंजन बनाया, एक भी कंपनी ने भारत को तकनीक तो दूर सहयोग तक नहीं दिया | मारुती में जो सुजुकी का इंजन लगता है वो इंजन यहाँ नहीं जापान में बनता है, हीरो होंडा में जो इंजन लगता था वो जापान से बन के आता था , मतलब ये है कि अपने तकनीक को ये कम्पनियाँ शेयर नहीं करती वो कोई तकनीक जानते हैं तो आपको देते नहीं हैं और जब वही तकनीक उनके लिए पुरानी या बेकार हो जाती है तो वो उसे भारत में ला के dump कर देती हैं और हम खुश हो जाते हैं कि नयी तकनीक आयी है |
आप दुनिया में जितने भी विकसित देश देखेंगे वो सब स्वदेशी के बल पर आगे आये हैं | भारत को भी खड़ा करना है तो स्वदेशी के माध्यम से ही खड़ा किया जा सकता है | अगर आप विदेशियों पर निर्भर हैं या परावलम्बी है तो आप दुनिया में कभी कोई ताकत हासिल नहीं कर सकते | विदेशी वैसाखी पर, परावलम्बी होकर, विदेशी चिंतन से, विदेशी अर्थव्यवस्था की नीतियों की नक़ल से कोई देश कभी आगे नहीं आता, हर देश को आगे आने के लिए स्वदेशी का चिंतन, स्वदेशी का मनन और स्वदेशी का अनुपालन करना पड़ता है |
15 अगस्त 1947 को भारत ऐसा नहीं था, भारत के ऊपर एक रूपये का विदेशी कर्ज नहीं था, भारत का व्यापार घाटा एक रूपये का नहीं था | एक डौलर की कीमत भारत के एक रुपया के बराबर थी, एक पोंड की कीमत एक रुपया के बराबर थी और एक जर्मन मार्क की कीमत भी एक रुपया थी, भारत आजाद हुआ तो भारत को आगे की तरफ बढ़ना चाहिए था लेकिन हुआ उल्टा | हमारे नीति निर्धारकों ने भारत को पश्चिम के रास्ते आगे बढ़ाने का प्रयास किया जो कि किसी भी दृष्टिकोण से बुद्धिमत्ता नहीं कही जा सकती है | आज का भारत कर्ज में डूबा हुआ भारत है, भारत की हर प्राकृतिक चीज विदेशियों के हाथ में चली गयी है, अब तो भारत के लोग भी भारतीय नहीं रहे, जब कोई राष्ट्र की बात करता है तो लोग उसे ही गालिया देने लगते हैं | मैं भारत में पैदा हुआ और भारत की संस्कृति में पला-बढ़ा, और हमारे भारत की संस्कृति में मरने वाले के आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है लेकिन मैं भगवान से ये प्रार्थना करता हूँ कि इन 64 सालों में जिन-जिन शासकों ने भारत को इस दुष्चक्र में पहुँचाया है, उनकी आत्मा को कभी शांति प्रदान ना करें |....................
आप दुनिया में जितने भी विकसित देश देखेंगे वो सब स्वदेशी के बल पर आगे आये हैं | भारत को भी खड़ा करना है तो स्वदेशी के माध्यम से ही खड़ा किया जा सकता है | अगर आप विदेशियों पर निर्भर हैं या परावलम्बी है तो आप दुनिया में कभी कोई ताकत हासिल नहीं कर सकते | विदेशी वैसाखी पर, परावलम्बी होकर, विदेशी चिंतन से, विदेशी अर्थव्यवस्था की नीतियों की नक़ल से कोई देश कभी आगे नहीं आता, हर देश को आगे आने के लिए स्वदेशी का चिंतन, स्वदेशी का मनन और स्वदेशी का अनुपालन करना पड़ता है |
15 अगस्त 1947 को भारत ऐसा नहीं था, भारत के ऊपर एक रूपये का विदेशी कर्ज नहीं था, भारत का व्यापार घाटा एक रूपये का नहीं था | एक डौलर की कीमत भारत के एक रुपया के बराबर थी, एक पोंड की कीमत एक रुपया के बराबर थी और एक जर्मन मार्क की कीमत भी एक रुपया थी, भारत आजाद हुआ तो भारत को आगे की तरफ बढ़ना चाहिए था लेकिन हुआ उल्टा | हमारे नीति निर्धारकों ने भारत को पश्चिम के रास्ते आगे बढ़ाने का प्रयास किया जो कि किसी भी दृष्टिकोण से बुद्धिमत्ता नहीं कही जा सकती है | आज का भारत कर्ज में डूबा हुआ भारत है, भारत की हर प्राकृतिक चीज विदेशियों के हाथ में चली गयी है, अब तो भारत के लोग भी भारतीय नहीं रहे, जब कोई राष्ट्र की बात करता है तो लोग उसे ही गालिया देने लगते हैं | मैं भारत में पैदा हुआ और भारत की संस्कृति में पला-बढ़ा, और हमारे भारत की संस्कृति में मरने वाले के आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की जाती है लेकिन मैं भगवान से ये प्रार्थना करता हूँ कि इन 64 सालों में जिन-जिन शासकों ने भारत को इस दुष्चक्र में पहुँचाया है, उनकी आत्मा को कभी शांति प्रदान ना करें |....................
Sunday, March 4, 2012
Riots under Congress ruling
(1) 1964 Communal riots in Rourkela & Jamshedpur | 2000 Killed | Ruling party CONGRESS (2) 1947 Communal riots in Bengal | 5000 Killed | Ruling party happened to be CONGRESS (3) August 1967 | 200 Killed | Communal riots in Ranchi | Party ruling again CONGRESS (4) 1969 | Communal riots in Ahmedabad | More than 512 Kill...ed | Ruling party happened to be CONGRESS (5) 1970 | Bhiwandi communal riots in Maharashtra | Around 80 killed | Ruling party CONGRESS (6) April 1979 | Communal riots in Jamshedpur, West Bengal | More than 125 killed | Ruling party CPIM (Communist Party) (7) August 1980 | Moradabad Communal riots | Approx 2000 Killed | Ruling Party CONGRESS (8) May 1984 | Communal riots in Bhiwandi | 146 Killed , 611 Inj | Ruling party CONGRESS | CM – Vasandada Patil (9) Oct 1984 | Communal riots in Delhi | 2733 Killed | Ruling party CONGRESS (10) April 1985 | Communal riots inAhmedabad | 300 Killed | Ruling party CONGRESS (11) July 1986 | Communal violence in Ahmedabad | 59 Killed | Ruling party CONGRESS (12) Apr-May 1987 | Communal violence in Meerut , UP | 81 killed | Ruling party CONGRESS (13) Feb 1983 | Communal violence in Nallie, Assam | 2000 killed | PM – Indira Gandhi (CONGRESS) Who is responsible for all Riots?????
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